Human Rights Commission takes a tough stance: Suo motu cognizance taken of the brutal assault on a Dalit teenage girl in Deoria and the Ludhiana sewer tragedy; notices issued to officials.Human Rights Commission takes a tough stance: Suo motu cognizance taken of the brutal assault on a Dalit teenage girl in Deoria and the Ludhiana sewer tragedy; notices issued to officials.

अनिवार्य प्रश्न। संवाद।

नई दिल्ली एवं वाराणसी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने देश में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के दो अलग-अलग मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने उत्तर प्रदेश के देवरिया में एक दलित किशोरी के साथ हुई अमानवीय बर्बरता और पंजाब के लुधियाना में सीवर सफाई के दौरान तीन श्रमिकों की मौत के मामले में संबंधित राज्यों के अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

2 जून 2026 की मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर, पहला मामला यूपी के देवरिया जिले का है। यहाँ चोरी के संदेह में एक दुकानदार ने 14 वर्षीय अनुसूचित जाति की किशोरी के साथ क्रूरता की हदें पार कर दीं। किशोरी के बाल पकड़कर उसे पूरे गांव में अपमानजनक ढंग से घुमाया गया और फिर घसीटकर घर ले जाकर एक पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा गया। इस घृणित कृत्य पर संज्ञान लेते हुए एनएचआरसी ने देवरिया के जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को नोटिस भेजकर रिपोर्ट मांगी है।

वहीं, दूसरा मामला पंजाब के लुधियाना जिले का है, जहाँ 1 जून को एक कारखाने में बिना किसी सुरक्षा उपकरण के रासायनिक सीवेज लाइन साफ करने उतरे तीन श्रमिकों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में दो अन्य सहायक कर्मचारी भी बेहोश हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। आयोग ने इसे श्रमिकों के जीवन के अधिकार का घोर उल्लंघन मानते हुए पंजाब सरकार के मुख्य सचिव और लुधियाना के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है।

एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि यदि मीडिया रिपोर्ट्स सत्य हैं, तो ये दोनों ही घटनाएं मानवाधिकारों के गंभीर हनन को दर्शाती हैं। लुधियाना मामले में आयोग ने पुलिस जांच की स्थिति, घायल श्रमिकों के स्वास्थ्य और मृतकों के परिजनों के लिए सरकार द्वारा घोषित मुआवजे के विवरण की भी विशेष रूप से मांग की है। दोनों ही मामलों में अधिकारियों को अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए दो सप्ताह का सख्त अल्टीमेटम दिया गया है।

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