अनिवार्य प्रश्न। संवाद। बेंगलुरु। भारतीय वायुसेना की हवाई निगरानी और युद्धक क्षमताओं में एक बड़ा और ऐतिहासिक इजाफा हुआ है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने गुरुवार को कर्नाटक के बेंगलुरु में आयोजित एक विशेष समारोह में स्वदेशी विमानस्थ प्रारंभिक चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली (AEW&C) ‘नेत्र’ का अंतिम परिचालन स्वीकृति (एफओसी) प्रमाणपत्र भारतीय वायुसेना को सौंप दिया है। यह प्रणाली भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में एक बहुत बड़ी छलांग मानी जा रही है। क्या है ‘नेत्र’ और क्यों है यह खास? ‘नेत्र’ एक अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम है, जिसे आसमान में भारत की ‘तीसरी आंख’ भी कहा जाता है। इसे मुख्य रूप से हवाई निगरानी, रियल-टाइम स्थिति संबंधी जागरूकता (Situational Awareness) और युद्ध प्रबंधन क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए तैयार किया गया है। ज्ञात हो कि इस प्रणाली को साल 2017 में ही प्रारंभिक परिचालन स्वीकृति (आईओसी) मिल गई थी। इसके बाद, बालाकोट हवाई हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों के दौरान ‘नेत्र’ ने अपनी विश्वसनीयता और उपयोगिता का लोहा मनवाया था। अब इसे पूर्ण एफओसी (FOC) मिलना इस बात का आधिकारिक प्रमाण है कि यह प्रणाली युद्ध की किसी भी परिस्थिति के लिए पूरी तरह से तैयार और परिपक्व है। प्रमाणपत्र सौंपने के इस गरिमामय समारोह की अध्यक्षता डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ, एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने की। अपने संबोधन में उन्होंने डीआरडीओ, वायुसेना और रक्षा उद्योग के बीच के बेहतरीन तालमेल की जमकर सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वदेशी तकनीक होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि हमारी सशस्त्र सेनाएं बदलती युद्ध परिस्थितियों और नई चुनौतियों के अनुसार अपनी प्रणालियों में तुरंत आवश्यक बदलाव और अनुकूलन कर सकती हैं। इस अवसर पर डीआरडीओ के एयरोनॉटिक्स क्लस्टर की महानिदेशक डॉ. के. राजलक्ष्मी मेनन ने ‘नेत्र’ के विकास के चुनौतीपूर्ण सफर को साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे सिस्टम इंजीनियरिंग और सटीक उड़ान परीक्षणों की बदौलत यह महत्वाकांक्षी परियोजना अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकी। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर के महानिदेशक डॉ. बी.के. दास ने इस उपलब्धि को ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक अहम मिसाल बताया। इस भव्य आयोजन में पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) आर.के.एस. भदौरिया, डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. क्रिस्टोफर और सीएबीएस की निदेशक श्रीमती पी. संध्या सहित कई गणमान्य हस्तियां मौजूद थीं। इस मौके पर उन सभी रक्षा उत्पादन संगठनों, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के साझेदारों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने एक साधारण ‘अवधारणा’ (Concept) को एक पूरी तरह से कार्यशील और अभेद्य रक्षा प्रणाली में बदलने के लिए दिन-रात काम किया। ‘नेत्र’ प्रणाली का भारतीय वायुसेना में पूर्ण रूप से शामिल होना न केवल सेना की मारक और निगरानी क्षमता को कई गुना बढ़ाता है, बल्कि यह विश्व पटल पर भारत की उस उभरती हुई छवि को भी पुष्ट करता है जहाँ देश रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भर रहने के बजाय खुद एक प्रमुख रक्षा निर्माता बन रहा है। Post navigation अब दवाओं की कीमतों और शिकायतों के लिए एक ही एकीकृत डिजिटल मंच, पारदर्शिता और नागरिक सुविधा में होगा इजाफा DoT ने ऑथराइज़ेशन और लाइसेंस माइग्रेशन के लिए लॉन्च किया ‘डिजिटल बाय डिज़ाइन’ पोर्टल