अनिवार्य प्रश्न। संवाद। पटना। बिहार के मुंगेर जिले में स्थित आईटीसी परिसर से एक ऐतिहासिक और वैज्ञानिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण खोज सामने आई है, जहाँ करीब 700 वर्ष पुराना बरगद का वृक्ष (फाइकस बेंगालेंसिस) मिला है। पारंपरिक लोककथाओं या ऐतिहासिक अनुमानों के बजाय पूरी तरह से अत्याधुनिक वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित इस खोज के बाद, इसे देश का सबसे पुराना और सटीक तिथि वाला बरगद का पेड़ माना गया है। यह ऐतिहासिक अनुसंधान लखनऊ के बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (डीएसटी के तहत एक स्वायत्त निकाय) की वैज्ञानिक डॉ. त्रिना बोस के नेतृत्व में डॉ. मयंक शेखर और डॉ. अखिलेश के. यादव की टीम द्वारा किया गया है, जिसका विवरण प्रतिष्ठित शोध पत्रिका ‘क्वाटरनरी रिसर्च’ में प्रकाशित हुआ है। उष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले वृक्षों में स्पष्ट वार्षिक वृद्धि-वलय (ग्रोथ रिंग्स) न होने के कारण पारंपरिक डेन्ड्रोक्रोनोलॉजी तकनीकें यहाँ बेअसर साबित हो रही थीं। इस चुनौती से निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने पेड़ के द्वितीयक तने और सबसे प्राचीन प्राथमिक शाखा के केंद्र (पिथ) से लकड़ी के नमूने लेकर ‘अल्फा-सेल्यूलोज’ निकाला और एक्सीलरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (एएमएस) आधारित उच्च-सटीकता वाली रेडियोकार्बन डेटिंग का उपयोग किया। इसके बाद नवीनतम आईएनटीसीएएल20 कैलिब्रेशन वक्र और ओएक्ससीएएल सॉफ्टवेयर की मदद से सटीक आयु का निर्धारण किया गया। इस वैज्ञानिक विश्लेषण ने उन पुराने अनुमानों को खारिज कर दिया है जिसमें माना जाता था कि इस पेड़ को करीब 300-350 साल पुराने उत्तर मुगल या प्रारंभिक ब्रिटिश काल के ‘बुरा बंगला’ (BURRA BANGLA) के सामने लगाया गया था। नई खोज से यह साबित होता है कि यह 700 साल पुराना विशाल वृक्ष वास्तव में इस क्षेत्र में कभी रहे एक प्राचीन प्राकृतिक जंगल का जीवित अवशेष है, जो इस ऐतिहासिक इमारत के निर्माण का मूक गवाह रहा है। यह खोज न केवल मुंगेर क्षेत्र के ऐतिहासिक घटनाक्रम को फिर से परिभाषित करती है, बल्कि दुनिया भर के प्राचीन उष्णकटिबंधीय वृक्षों की आयु निर्धारण के लिए एक नया वैज्ञानिक मार्ग प्रशस्त करती है। बरगद के पेड़ अपने जटिल जाल के कारण स्थानीय जैव विविधता और वन्यजीवों के लिए एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र प्रदान करते हैं। वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह अभिनव कार्यप्रणाली अब सरकारों, वन विभागों और वैश्विक संरक्षण एजेंसियों को सांस्कृतिक और पर्यावरणीय रूप से महत्वपूर्ण विरासत वृक्षों की सटीक पहचान करने तथा उनके संरक्षण प्रबंधन को मजबूत करने में मदद करेगी। Post navigation विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ