अनिवार्य प्रश्न

पखवाड़ा है हिंदी का : कंचन सिंह परिहार

नवगीत : पखवाड़ा है हिंदी का पखवाड़ा है हिंदी का, पखवाड़ा है हिंदी का। आओ मिलकर साथ मनाएं, पखवाड़ा है हिंदी का।।1।। कल तक वो जो अंग्रेजी के गुण गाने … Read More

‘‘आओ दीप जलाएं फिर से!’’ -गीतकार – छतिश द्विवेदी कुंठित’

गीत ‘‘आओ दीप जलाएं फिर से!’’ सनातन के पावन पर्व दीपावली पर सभी पाठकों को शुभकामना देते हुए उद्गार काव्य के इस अनुभाग में प्रस्तुत है गीत ‘‘आओ दीव जलाएँ … Read More

उद्गार काव्य : देश पर गुमान : रुद्राणी घोष

देश पर गुमान युवा कवयित्री : रुद्राणी घोष मुझसे पूछा एक अंगरेज ने, तु़झे क्यों हैं इतना गुमान अपने देश पर? खाने को भरपेट खाना नहीं, आधी आबादी सोती है … Read More

कविता: सुख-दुख दोनों अतिथि हमारे: कंचन सिंह परिहार

कविता: सुख-दुख दोनों अतिथि हमारे  : कंचन सिंह परिहार सुख-दुख दोनों अतिथि हमारे। कभी साथ न दोनों आते, हरदम रहते आते-जाते, कब है आना कब है जाना, कितने दिन कब … Read More