सबको वियोग में छोड़ गये वियोगी

अनिवार्य प्रश्न। ब्यूरो संवाद। उद्गार के वियोगी को दी गई भावभींनी विदाई टूट गई वियोगी, विरही एवं कुंठित की ख्यात जोड़ी कवि वियोगी वाराणसी की संस्था ‘उद्गार’ के लगभग 9 … Read More

बौराया बनारस, बेहोश प्रशासन : छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’

आलेख। बौराया बनारस, बेहोश प्रशासन : छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’ के साथ अनिवार्य प्रश्न फीचर डेस्क। बनारस की शान अपने आप में अनोखी है। यहां का हर आदमी अपने अल्हड़ता के … Read More

ढोंगी तीर्थ पुरोहितों से मुक्ति के लिए चीखते तीर्थ स्थल : छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’

आलेख। पूरे भारत में कुछ एक तीर्थ स्थानों को छोड़कर लगभग सभी प्रदेशों के सभी तीर्थ स्थानों पर 80 प्रतिशत तीर्थ पुरोहितों या कहें कथित पंडितों द्वारा जो मायाजाल फैलाया … Read More

मोबाइल युग, कश्मकश में जिंदगी बस जीये जा रहे हैं लोग : पायल लक्ष्मी सोनी

आलेख समय बदल चुका है और हमने समय के साथ चलना सीख भी लिया है। समय के साथ बहुत से बदलावों को अपनाया और बहुत सी आदतों को छोड़ दिया … Read More

सैनिक स्कूल तिलैया – राष्ट्र निर्माण का अहम् भागीदार : “तिलैयन डायरी” से उद्धृत अंश

पुटुस से पटे हुए सड़क के दोनों किनारे। मुख्य दरवाजे पर बारिश से भीगा तोप। अंदर घुसते ही, बाईं तरफ छोटी-छोटी दकानें, जो एक बोर्डिंग स्कूल में रह रहे बच्चोँ … Read More

विधिक मंथन : क्या हाउसिंग सोसायटी अविवाहित लोगों को घर किराए पर लेने से रोक सकता है? – एड. संजय पांडे

कई मकान मालिकों का कुंवारे या अकेले रह रहे लोगों को घर किराये पर देने का अनुभव अच्छा होता है. साथ ही, कुंवारे लोगों को किराए पर लेना फ्लैट मालिक … Read More

इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म का अंत या अल्पविराम? – वीरेंद्र बहादुर सिंह

दिल्ली में एक पुस्तक के लोकार्पण के दौरान भारत के मुख्य न्यायमूर्ति एन.वी.रमण ने अपने भाषण के दौरान कहा था कि ‘देश में इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म का अंत आ गया है। … Read More

आजादी में योगदान और बलिदान देनेवाली विरांगनाओं का इतिहास : अस्मिता प्रशांत ‘पुष्पांजलि’

हम जब भी उंचे निल गगन में शान से लहराते तिरंगे को राष्ट्रगीत के साथ सलामी देते हैं, तो अपनी छाती को गर्व से और भी दो इंच फुला हुआ … Read More

पुस्तकों का दान अब जरुरी होता जा रहा है! लेेखक सलिल सरोज की कलम से…

“एक बार जब आप पढ़ना सीख लेते हैं, तो हमेशा के लिए आजाद हो जाते हैं।” – फ्रेडरिक डगलस पुस्तकें आपको सोचने-समझने पर विवश करती है और मनुष्य को मनुष्य … Read More

कोविड-19 का दूसरा डोज जरूरी क्यों?

अनिवार्य प्रश्न। संवाद हम सभी ने विगत दो लहरों में देखा है कि कोरोना बीमारी लईलाज है तथा इसके खतरे इतने ज्यादा हैं कि कुछ लोग काल कवलित हो जाते … Read More