अनिवार्य प्रश्न

पखवाड़ा है हिंदी का : कंचन सिंह परिहार

नवगीत : पखवाड़ा है हिंदी का पखवाड़ा है हिंदी का, पखवाड़ा है हिंदी का। आओ मिलकर साथ मनाएं, पखवाड़ा है हिंदी का।।1।। कल तक वो जो अंग्रेजी के गुण गाने … Read More

‘‘आओ दीप जलाएं फिर से!’’ -गीतकार – छतिश द्विवेदी कुंठित’

गीत ‘‘आओ दीप जलाएं फिर से!’’ सनातन के पावन पर्व दीपावली पर सभी पाठकों को शुभकामना देते हुए उद्गार काव्य के इस अनुभाग में प्रस्तुत है गीत ‘‘आओ दीव जलाएँ … Read More

उद्गार काव्य : देश पर गुमान : रुद्राणी घोष

देश पर गुमान युवा कवयित्री : रुद्राणी घोष मुझसे पूछा एक अंगरेज ने, तु़झे क्यों हैं इतना गुमान अपने देश पर? खाने को भरपेट खाना नहीं, आधी आबादी सोती है … Read More

कविता: सुख-दुख दोनों अतिथि हमारे: कंचन सिंह परिहार

कविता: सुख-दुख दोनों अतिथि हमारे  : कंचन सिंह परिहार सुख-दुख दोनों अतिथि हमारे। कभी साथ न दोनों आते, हरदम रहते आते-जाते, कब है आना कब है जाना, कितने दिन कब … Read More

गुलाबी इश्क: मानसी श्रीवास्तव

गुलाबी इश्क शहर के शोर सा मचलता मेरा मनगर्मी की भोर सा खिलता गगन आये हो सो ठीक है साथ लाना वाकई जरूरी थाएक व्याकुल सा मन ? आये तो … Read More

ये मजदूर औरतें -दीपक शर्मा, जौनपुर, उत्तर प्रदेश-मजदूर दिवस विशेष

  ये मजदूर औरतें दिन रात करती हैं काम नहीं जानती आराम चलाती हैं फावड़ा खोदती हैं मिट्टी पाथती हैं ईंट छाती के बल खीचती हैं सगड़ी दूधमूँहें बच्चे को … Read More

नज्म : चलो हम गरीबों का घर देख आयें।

शाइर महेन्द्र तिवारी ‘अलंकार’ चलो हम गरीबों का घर देख आयें। बेनूर बेबस नजर देख आयें। सामान कोई नहीं जिन्दगी का मगर जिन्दगी का सफर देख आयें। कीचड़ सनी राह … Read More

गजल

बेचारगी को उम्रभर…डाॅ. नसीमा निशा, वाराणसी मोहताज दाने दाने को होता रहा किसान।बंजर जमीं में ख्वाब को बोता रहा किसान।।सरकार हो किसी की धोखा ही है मिला,बेचारगी को उम्रभर ढोता … Read More