अनिवार्य प्रश्न

पखवाड़ा है हिंदी का : कंचन सिंह परिहार

नवगीत : पखवाड़ा है हिंदी का पखवाड़ा है हिंदी का, पखवाड़ा है हिंदी का। आओ मिलकर साथ मनाएं, पखवाड़ा है हिंदी का।।1।। कल तक वो जो अंग्रेजी के गुण गाने … Read More

कोरोना महामारी के रोकथाम में भारतीय चिकित्सा पद्धति ‘आयुर्वेद’ काफी सफल : वैद्य रोहित पाण्डेय

वैद्य रोहित पाण्डेय महामारी अर्थात जनमार या जनपदोध्वंश समय-समय पर मानव सभ्यता की क्षति करती है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कोरोना वायरस का संक्रमण विकराल रूप लेकर महामारी ही बन चुका … Read More

मादक द्रव्यों के सामाजिक नुकसान : सलिल सरोज

मादक द्रव्यों के सामाजिक नुकसान विषय को केन्द्र में रखकर मादक द्रब्यों के सेवन के व्यापक नुकसान की पड़ताल कर रहे हैं वरिष्ठ लेखक सलिल सरोज युवा पीढ़ी में मादक … Read More

मदिरापान के होते हैं व्यापक दुष्परिणाम

मदिरापान के होते हैं व्यापक दुष्परिणाम अपने वैज्ञानिक व तर्कपूर्ण विवेचना से शराब सेवन करने वालों के जीवन पर पड़ने वाले भयानक नकारात्मक प्रभावों का सुन्दर शाब्दिक रेखांकन कर रहे … Read More

राजभाषा हिंदी में मौलिक पुस्तक लेखन हेतु राजभाषा गौरव पुरस्कार योजना-वर्ष 2020 के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित

अनिवार्य प्रश्न। संवाद नई दिल्ली| राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय द्वारा हिंदी में मौलिक पुस्तक लेखन के लिए चलाई जा रही निम्नलिखित पुरस्कार योजनाओं के लिए 01.01.2020 से 31.12.2020 के दौरान … Read More

महात्मा गांधी और नया भारत: सलिल सरोज

महात्मा गांधी की भूमिका और प्रभाव को निर्विवाद मानते हुए उनके विचारों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में बेहत प्रासंगिक व अचूक मान रहे हैं वरिष्ठ लेखक व कवि सलिल सरोज। न्यू … Read More

असंगठित किसानों के प्रति सभी सरकारों की उदासीनता : सलिल सरोज

असंगठित क्षेत्र के किसानों के जीवन में व्याप्त कठिनाइयां एवं उनके जीवन से जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए किसानों के प्रति भारतीय सरकारों की उदासीनता को रेखांकित कर रहे … Read More

‘‘आओ दीप जलाएं फिर से!’’ -गीतकार – छतिश द्विवेदी कुंठित’

गीत ‘‘आओ दीप जलाएं फिर से!’’ सनातन के पावन पर्व दीपावली पर सभी पाठकों को शुभकामना देते हुए उद्गार काव्य के इस अनुभाग में प्रस्तुत है गीत ‘‘आओ दीव जलाएँ … Read More

हम किसी और के संसार में रहने लगे हैं…. गांधी विचारक धर्मपाल

धर्मपाल जी विख्यात चिंतक एवं गांधी विचारक हैं। प्रस्तुत है उनका लिखा एक आलेख… भारतीय मानस में सृष्टि के विकास के क्रम और उसमें मानवीय प्रयत्न और मानवीय ज्ञान-विज्ञान के … Read More

उद्गार काव्य : देश पर गुमान : रुद्राणी घोष

देश पर गुमान युवा कवयित्री : रुद्राणी घोष मुझसे पूछा एक अंगरेज ने, तु़झे क्यों हैं इतना गुमान अपने देश पर? खाने को भरपेट खाना नहीं, आधी आबादी सोती है … Read More