अनिवार्य प्रश्न

असंगठित किसानों के प्रति सभी सरकारों की उदासीनता : सलिल सरोज

असंगठित क्षेत्र के किसानों के जीवन में व्याप्त कठिनाइयां एवं उनके जीवन से जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए किसानों के प्रति भारतीय सरकारों की उदासीनता को रेखांकित कर रहे … Read More

‘‘आओ दीप जलाएं फिर से!’’ -गीतकार – छतिश द्विवेदी कुंठित’

गीत ‘‘आओ दीप जलाएं फिर से!’’ सनातन के पावन पर्व दीपावली पर सभी पाठकों को शुभकामना देते हुए उद्गार काव्य के इस अनुभाग में प्रस्तुत है गीत ‘‘आओ दीव जलाएँ … Read More

हम किसी और के संसार में रहने लगे हैं…. गांधी विचारक धर्मपाल

धर्मपाल जी विख्यात चिंतक एवं गांधी विचारक हैं। प्रस्तुत है उनका लिखा एक आलेख… भारतीय मानस में सृष्टि के विकास के क्रम और उसमें मानवीय प्रयत्न और मानवीय ज्ञान-विज्ञान के … Read More

उद्गार काव्य : देश पर गुमान : रुद्राणी घोष

देश पर गुमान युवा कवयित्री : रुद्राणी घोष मुझसे पूछा एक अंगरेज ने, तु़झे क्यों हैं इतना गुमान अपने देश पर? खाने को भरपेट खाना नहीं, आधी आबादी सोती है … Read More

श्रद्धांजलि संस्मरण: मेरे मित्र सजल की याद में लिखते हुए कलम रोने लगी है… महेन्द्र नाथ तिवारी ‘अलंकार’

श्रद्धांजलि संस्मरण अनिवार्य प्रश्न अखबार समूह व उद्गार परिवार से वर्षों से जुड़े रहे वरिष्ठ कवि व लेखक श्री राधेश्याम तिवारी ‘सजल’ विगत 04 सितम्बर 2020 को काशी के साहित्य … Read More

लम्बा संघर्ष और अगणित बलिदान के बाद अयोध्या में बस पाए श्रीराम

भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण के लम्बे संघर्ष, उसके धार्मिक व सामाजिक महत्ता और उसके शिलान्यास में प्रयुक्त हर ईंट में भरे भावसिक्त संदेश को समझा रहे हैं नोएडा के … Read More

34 सालों बाद बदली शिक्षा की सूरत

नई शिक्षा नीति अंग्रेजी के साथ मातृभाषा के अलावा संस्कृत व देश की अन्य भाषाओं के सीखने पर जोर देने वाली है ऐसा मानते हुए विश्लेषण कर रहे हैं लेखक … Read More

मुंशी प्रेमचंद के 140 वें जन्मदिवस के अवसर त्रिदिवसीय चित्रकला प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

अनिवार्य प्रश्न । ब्यूरो संवाद वाराणसी। कहानी सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी के 140 वें जन्मदिवस के अवसर पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन शोध एवं अध्ययन केंद्र वाराणसी द्वारा उनके प्रसिद्ध उपन्यास … Read More

‘गोदान’ का सामाजिक विस्तार : विन्ध्यवासिनी मिश्रा

’गोदान’ का सामाजिक विस्तार औपनिवेशिक भारत में तमाम आर्थिक सामाजिक शैक्षिक असमानताओं या यूँ कहें कि अनेक असंतुलनों के काल में महान उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद जी के लेखन की पराकाष्ठात्मक … Read More

कविता: सुख-दुख दोनों अतिथि हमारे: कंचन सिंह परिहार

कविता: सुख-दुख दोनों अतिथि हमारे  : कंचन सिंह परिहार सुख-दुख दोनों अतिथि हमारे। कभी साथ न दोनों आते, हरदम रहते आते-जाते, कब है आना कब है जाना, कितने दिन कब … Read More